विस्तृत उत्तर
दैहिक ज्वर (शारीरिक) त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन से उत्पन्न होते हैं।
स्तोत्र में वर्णित दैहिक ज्वर हैं: वात ज्वर, कफ पित्तक और सन्निपात ज्वर।
स्तोत्र में इनके साथ-साथ काश (खाँसी), श्वास और श्लेष्मादिक रोगों का भी उल्लेख है जिनके शमन की प्रार्थना की गई है।