विस्तृत उत्तर
हाँ, स्तोत्र में प्रमुख नागों (अनंत, वासुकी, तक्षक आदि) के नामों का समावेश यह सुनिश्चित करता है कि यह केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष सर्प विष के प्रभाव को भी शांत करने की क्षमता रखता है।
फलश्रुति के अनुसार किसी भी प्रकार के विष का प्रभाव समाप्त हो जाता है (विषं विद्रवते)।
सर्प विष विनाश खंड में उनसे उत्पन्न होने वाले विषों को तुरंत 'छिंदी छिंदी' (काटने) और 'भिन्न भिन्न' (विखंडित करने) की प्रार्थना की जाती है।





