विस्तृत उत्तर
ब्रह्म ज्वर, विष्णु ज्वर और रुद्र ज्वर आध्यात्मिक/कर्मजन्य ज्वरों की श्रेणी में आते हैं।
इन ज्वरों का उल्लेख असाध्य, अत्यंत तीव्र, या देवता/कर्म से उत्पन्न रोगों की ओर संकेत करता है।
चूँकि नीलकंठ स्वरूप स्वयं त्रिमूर्ति से भी परे सदाशिव का प्रतीक है, अतः केवल इसी स्वरूप के हस्तक्षेप से इन उच्चतम स्तर के रोगों का निवारण संभव माना जाता है।





