स्तोत्र में चार श्रेणियों के ज्वर हैं: दैहिक (वात, पित्त, कफ), कालजन्य (एकाहिक से पंचाहिक), अदृश्य (भूत, प्रेत, पिशाच ज्वर) और आध्यात्मिक (ब्रह्म, विष्णु, रुद्र ज्वर)।
- 1दैहिक ज्वर (शारीरिक): वात ज्वर, कफ पित्तक, सन्निपात ज्वर — ये त्रिदोषों के असंतुलन से उत्पन्न होते हैं।
- 2कालजन्य ज्वर: एकाहिक (एक दिन का), द्वयाहिक, त्र्याहिक, चातुर्थिक, पंचाहिक ज्वर — ये चक्रीय प्रकृति के होते हैं।
- 3अदृश्य एवं तांत्रिक ज्वर: भूत ज्वर, प्रेत ज्वर, पिशाच ज्वर, डाकिनी ज्वर, शाकिनी ज्वर।
- 4आध्यात्मिक/कर्मजन्य ज्वर: ब्रह्म ज्वर, विष्णु ज्वर, रुद्र ज्वर — ये असाध्य, अत्यंत तीव्र या कर्म से उत्पन्न रोगों की ओर संकेत करते हैं।