विस्तृत उत्तर
मंत्र जप से नकारात्मक ऊर्जा दूर होने का वर्णन अथर्व वेद और तंत्र शास्त्र में है:
1मंत्र = दिव्य कवच
तंत्र शास्त्र में कहा गया है — नियमित मंत्र जप से साधक के चारों ओर एक दिव्य कवच बनता है। नकारात्मक ऊर्जाएं उस कवच को भेद नहीं सकतीं।
2ध्वनि का प्रभाव
मंत्र की विशेष ध्वनि तरंगें negative ions उत्पन्न करती हैं — जो नकारात्मक ऊर्जा को तटस्थ करती हैं।
3भागवत — नाम की महिमा
नामस्मरणमात्रेण भयं त्रस्यन्ति दानवाः।' — भगवान के नाम स्मरण मात्र से असुर (नकारात्मक शक्तियाँ) भाग जाती हैं।
4मन की शुद्धि
नकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत स्वयं का मन है — नकारात्मक विचार, भय, क्रोध। मंत्र जप से मन शुद्ध होता है → नकारात्मकता स्वतः दूर।
5विशेष रक्षा मंत्र
- ▸महामृत्युंजय — भय और रोग से रक्षा
- ▸दुर्गा कवच — बाहरी नकारात्मकता से
- ▸नृसिंह मंत्र — तत्काल रक्षा
6वैज्ञानिक
मंत्र जप से सकारात्मक विचारों का अभ्यास होता है — negative thought patterns धीरे-धीरे कमजोर पड़ते हैं।
व्यावहारिक
प्रातः उठकर 'ॐ' या गायत्री मंत्र जप — दिन भर सकारात्मक वातावरण।





