विस्तृत उत्तर
पाषाण अथवा किसी धातु से निर्मित शिवलिंग में मंत्रों द्वारा प्राण-शक्ति का संचार करना एक परम रहस्यमय और दिव्य विधान है। यह कोई लौकिक क्रिया या अंधविश्वास नहीं, अपितु आगम और तंत्र शास्त्रों में वर्णित एक गूढ़ आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा एक जड़ प्रतीत होने वाली प्रतिमा को चैतन्य और कृपा के जीवंत केंद्र में रूपांतरित कर दिया जाता है।
जिस प्रक्रिया को सामान्य भक्ति-भाषा में 'मंत्र प्रवेश' कहा जाता है, उसे हमारे शास्त्र प्राण-प्रतिष्ठा की संज्ञा देते हैं।
इस प्रकार, प्राण-प्रतिष्ठा का अर्थ है मूर्ति में देवता की जीवन-शक्ति, उनकी चेतना और उनकी समस्त इंद्रियों को स्थापित करना, जिससे वे भक्तों की पूजा और प्रार्थना को साक्षात् रूप में ग्रहण करने में सक्षम हो जाएं।





