विस्तृत उत्तर
सनातन तंत्र शास्त्र के अनुसार, जब तक किसी मंत्र या जप माला में 'प्राण' (जीवन ऊर्जा) का संचार न किया जाए, तब तक वह केवल शब्दों का समूह या निर्जीव वस्तु रहती है। प्राण प्रतिष्ठा वह गुप्त प्रक्रिया है जिसके द्वारा मंत्र के अधिष्ठात्री देवता की ब्रह्मांडीय ऊर्जा को उस विशेष मंत्र या माला में स्थापित किया जाता है।
मंत्र को जाग्रत करने के लिए 'ॐ अं आं इं ईं... क्षं सः सोऽहम्' जैसे विशिष्ट प्राण-प्रतिष्ठा बीज मंत्रों का उपयोग किया जाता है। साधक अपनी श्वास (प्राण वायु) और संकल्प शक्ति के माध्यम से यह भावना करता है कि परब्रह्म की चेतना इस मंत्र में प्रवेश कर रही है। जब किसी योग्य गुरु द्वारा दीक्षा के समय शिष्य के कान में मंत्र फूंका जाता है, तो गुरु का तपोबल ही उस मंत्र की 'प्राण प्रतिष्ठा' कर देता है, जिससे वह मंत्र शिष्य के लिए तत्काल जाग्रत और फलदायी हो जाता है।





