विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म के मंत्र शास्त्र में किसी मंत्र को पूर्ण रूप से सिद्ध करने की प्रक्रिया को 'पुरश्चरण' कहा जाता है। शिव पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' के लिए शिव पुराण में विधान है कि इस मंत्र का 10 लाख (दस लाख) बार जप करने से यह मंत्र साधक के लिए जाग्रत (सिद्ध) हो जाता है।
यह एक बड़ा अनुष्ठान है जिसे संकल्प लेकर कुछ महीनों या वर्षों में पूरा किया जाता है। साधक प्रतिदिन एक निश्चित संख्या में (जैसे 10 या 20 माला) रुद्राक्ष की माला से जप करता है। इस अवधि में भूमि शयन (जमीन पर सोना), ब्रह्मचर्य और सात्विक आहार का पालन करना होता है। 10 लाख जप पूर्ण होने के बाद इसका दशांश (1 लाख) हवन, तर्पण और ब्राह्मण भोजन कराया जाता है। इसके सिद्ध होने पर साधक की वाणी में शिव का वास हो जाता है और उसकी हर प्रार्थना स्वीकार होती है।





