विस्तृत उत्तर
शाबर मंत्रों की रचना भगवान शिव के निर्देश पर मुख्य रूप से गुरु गोरखनाथ और नवनाथों द्वारा की गई थी। ये ग्रामीण और लोक भाषाओं में रचे गए अत्यंत उग्र और शीघ्र फलदायी मंत्र हैं। वैदिक मंत्रों के विपरीत, इनमें लंबे न्यास, ध्यान या कठिन संस्कृत व्याकरण की आवश्यकता नहीं होती। ये मंत्र 'स्वयं सिद्ध' माने जाते हैं।
इन्हें जाग्रत करने की विधि अत्यंत सरल है। होली, दीपावली, महाशिवरात्रि, या सूर्य/चंद्र ग्रहण के समय किसी एकांत स्थान पर बैठें। सामने सरसों के तेल का दीपक और गुग्गुल की धूप जलाएं। पूर्ण श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ मंत्र का केवल 108 या 1008 बार जप करने से वह मंत्र सिद्ध हो जाता है। इन मंत्रों में देवताओं को 'आन' (कसम या दुहाई) दी जाती है, इसलिए साधक का अपने गुरु और इष्ट पर अंधविश्वास की हद तक भरोसा होना ही इनकी सिद्धि की एकमात्र कुंजी है।
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