विस्तृत उत्तर
यह जप का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य नियम है। जप करते समय तर्जनी उंगली का स्पर्श माला से कदापि नहीं होना चाहिए।
शास्त्रीय कारण: शास्त्रों में तर्जनी उंगली को 'अहंकार' का प्रतीक माना गया है। इसी उंगली का प्रयोग किसी पर आरोप लगाने, आदेश देने या क्रोध प्रकट करने के लिए किया जाता है।
जप पूर्ण समर्पण, विनम्रता और भक्ति का कार्य है। इसमें अहंकार का लेशमात्र भी स्थान नहीं है। अहंकार की प्रतीक इस उंगली का प्रयोग करने से जप की सात्विक ऊर्जा दूषित हो जाती है और साधना निष्फल हो सकती है।
इसीलिए जप करते समय इस उंगली को 'गोमुखी' से बाहर रखा जाता है, जो इस बात का भौतिक अनुस्मारक है कि हमें अपना अहंकार अपनी साधना से बाहर रखना है।



