विस्तृत उत्तर
नारायणास्त्र भगवान विष्णु (नारायण) का अत्यंत शक्तिशाली और अजेय दिव्यास्त्र है। यह त्रिदेवों के तीन महास्त्रों में से एक है — ब्रह्मा का ब्रह्मास्त्र, विष्णु का नारायणास्त्र और शिव का पाशुपतास्त्र।
नारायणास्त्र की विशेषताएं — यह अस्त्र एक साथ हजारों घातक विनाशकारी अस्त्रों को लगातार दागने की क्षमता रखता है। यह किसी भी शत्रु का नाश कर सकता है। इसे जीवन में केवल एक बार ही उपयोग किया जा सकता है।
इसे रोकने का एकमात्र उपाय — नारायणास्त्र का कोई अस्त्र-प्रतिकार नहीं है। इसे रोकने का एकमात्र तरीका है कि शत्रु पूर्णतः अस्त्र-शस्त्र त्यागकर निहत्था होकर पूर्ण समर्पण कर दे — तब यह अस्त्र उसे हानि नहीं पहुँचाता। युद्ध के नियमों के अनुसार निहत्थे पर वार नहीं होता इसलिए समर्पण से यह शांत हो जाता है।
महाभारत में — महाभारत के युद्ध के 16वें दिन अश्वत्थामा ने यह अस्त्र पांडव-सेना पर चलाया था। भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अस्त्र-शस्त्र त्यागकर नतमस्तक होने की सलाह दी। भीम इनकार करते रहे किंतु अंतत: सभी ने समर्पण किया और नारायणास्त्र शांत हो गया।





