विस्तृत उत्तर
जपमाला को सदैव 'गोमुखी' नामक एक विशेष थैली में रखकर ही जप करना चाहिए।
गोमुखी माला को बाह्य अशुद्धियों, धूल-मिट्टी और दूसरों की दृष्टि से बचाती है।
ऐसा माना जाता है कि जप करते समय यदि किसी की दृष्टि माला पर पड़ जाए, तो जप की ऊर्जा का क्षय होता है।
गोमुखी साधना में गोपनीयता और विनम्रता का भाव भी बनाए रखती है।
जप करते समय तर्जनी उंगली को 'गोमुखी' से बाहर रखा जाता है, जो इस बात का भौतिक अनुस्मारक है कि हमें अपना अहंकार अपनी साधना से बाहर रखना है।





