मध्यमा और अंगूठे का जप में क्या महत्व है का सबसे सीधा सार यह है: मध्यमा = आकाश तत्व (शुद्ध और निष्पक्ष आधार); अंगूठा = अग्नि तत्व (प्रत्येक मंत्र के साथ साधक के कर्मों और अशुद्धियों को भस्म करने का द्योतक)।
जप की शास्त्र सम्मत विधि जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
•उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
•जप की शास्त्र सम्मत विधि श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
•यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।