बिना प्राण प्रतिष्ठा के रत्न धारण करने से क्या होता है का सबसे सीधा सार यह है: बिना शुद्धि और प्राण प्रतिष्ठा के रत्न धारण करना शास्त्र सम्मत नहीं — बिना इसके वह चैतन्य उपकरण नहीं, केवल एक सुंदर पत्थर ही रहता है।
अभिमंत्रण और प्राण प्रतिष्ठा जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
•उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
•अभिमंत्रण और प्राण प्रतिष्ठा श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
•यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।