का सरल उत्तर
बिना शुद्धि और प्राण प्रतिष्ठा के रत्न धारण करना शास्त्र सम्मत नहीं — बिना इसके वह चैतन्य उपकरण नहीं, केवल एक सुंदर पत्थर ही रहता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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