विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म की काल-गणना के अनुसार, 'योगिनी एकादशी' आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आती है। शास्त्रों में इसे पापों का शमन करने वाली और जीवात्मा के आध्यात्मिक उत्थान तथा शारीरिक आरोग्य (स्वस्थ शरीर) की प्राप्ति का एक वैज्ञानिक मार्ग बताया गया है। भविष्य पुराण के अनुसार, कलियुग के मनुष्यों के लिए यह एकादशी एकमात्र संबल है।




