विस्तृत उत्तर
प्रदोष काल भगवान शिव के अत्यधिक प्रसन्न रहने का समय माना जाता है, क्योंकि इस समय वे तांडव करते हैं।
इस कालावधि में किए गए अनुष्ठान की ऊर्जा उच्चतम होती है, जिससे सकाम कामनाओं की पूर्ति की संभावना अधिकतम हो जाती है।
प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटा पहले से लेकर डेढ़ घंटा बाद तक का समय होता है।





