विस्तृत उत्तर
जब शिव वास माता गौरी के साथ हो, तब रुद्राभिषेक मंत्र का जप और प्रयोग मनोकामना सिद्धि, सुख-समृद्धि और आनंद की वृद्धि प्रदान करता है।
गौरी वास की तिथियाँ — कृष्ण पक्ष की प्रथमा (1), अष्टमी (8), अमावस्या और शुक्ल पक्ष की द्वितीया (2), नवमी (9) — अति शुभ मानी जाती हैं।
यह देखा जाता है कि सकाम अनुष्ठान की सफलता के लिए शिव वास की अनुकूलता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। जब शिव गौरी के साथ होते हैं, तभी वह भक्त को भौतिक वरदान देने के लिए तैयार माने जाते हैं।





