विस्तृत उत्तर
नहीं। जब शिव वास श्मशान में हो (सप्तमी और चतुर्दशी तिथि पर), तो सकाम कर्म पूर्णतः वर्जित माने जाते हैं।
यह वास कामना पूर्ति के लिए फलदायी नहीं है, बल्कि संकटकारी हो सकता है।
सबसे गंभीर सावधानी यह है कि सकाम कर्मों का आरंभ तब नहीं किया जाना चाहिए जब शिव वास भोजन में (षष्ठी, त्रयोदशी) या श्मशान में (सप्तमी, चतुर्दशी) हो। इस नियम का पालन न करने पर कामना सिद्धि कठिन हो जाती है, बल्कि संकट उत्पन्न हो सकता है।





