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विस्तृत उत्तर
सूतक काल में सार्वजनिक संपर्क पूर्णतः निषिद्ध बताया गया है। मृत्यु के बाद घर और परिजनों में अशौच माना जाता है। इस समय का उद्देश्य परिजनों को सांसारिक कार्यों से हटाकर प्रेत की सद्गति और उसके पारलौकिक देह-निर्माण पर केंद्रित करना है। इसलिए आशीर्वाद देना, देव-प्रतिमा की पूजा करना, पलंग पर सोना, सार्वजनिक संपर्क और कई धार्मिक कर्म इस अवधि में वर्जित हैं।
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