विस्तृत उत्तर
तांडव नृत्य मूलतः भगवान शिव से जुड़ा है, परन्तु विष्णु जी से भी नृत्य का एक विशेष सम्बन्ध है जो मोहिनी अवतार से जुड़ा हुआ है। भगवान विष्णु का 'आनंद तांडव' वास्तव में एक विशेष शैवागम परम्परा से जुड़ी अवधारणा है जिसमें विष्णु और शिव की एकता का दर्शन होता है।
पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के बाद जब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण करके देवताओं को अमृत पिलाया, तब उस मनमोहक नृत्य को उन्होंने प्रस्तुत किया था। दक्षिण भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली 'मोहिनी अट्टम' इसी मोहिनी अवतार के दिव्य नृत्य से प्रेरित मानी जाती है।
इसके अतिरिक्त श्रीवैष्णव परम्परा में भगवान विष्णु की आनंद-लीलाओं का वर्णन मिलता है। तिरुपति बालाजी के मंदिर में और दक्षिण भारतीय वैष्णव मंदिरों में भगवान की नृत्य-भंगिमाएँ (विशेषतः तिरुवातिरा और उत्सव मूर्तियों में) देखने को मिलती हैं।
यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि 'विष्णु का आनंद तांडव' पद पूरी तरह शास्त्रसम्मत नहीं है — शैव परम्परा में 'आनंद तांडव' विशेषतः शिव के नटराज स्वरूप से जुड़ा है। विष्णु की नृत्यलीला का उल्लेख मोहिनी अवतार और मोहिनी अट्टम के रूप में अधिक मिलता है।





