विस्तृत उत्तर
वैकुंठ एकादशी (जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहते हैं) मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इसे सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक पुण्यदायिनी माना गया है। विशेषतः दक्षिण भारत में और श्रीवैष्णव परम्परा में इसका अत्यंत विशेष महत्व है।
पुराणों में वर्णित है कि इस दिन भगवान विष्णु के धाम वैकुंठ के द्वार — जिन्हें 'वैकुंठ द्वार' या 'स्वर्गद्वार' कहते हैं — भक्तों के लिए खुल जाते हैं। जो भक्त इस दिन सच्चे मन से व्रत, पूजन और जागरण करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट होते हैं और उन्हें मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है। इसीलिए इसे 'मोक्षदा एकादशी' भी कहते हैं।
भगवद्गीता का उपदेश भी मार्गशीर्ष मास में ही दिया गया था — इस सम्बन्ध से भी यह एकादशी विशेष पवित्र मानी जाती है। इस दिन व्रत रखना, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप, भगवान के कीर्तन में रात्रि जागरण और जरूरतमंदों को दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।





