विस्तृत उत्तर
एकादशी भगवान विष्णु की प्रिय तिथि है। इस दिन श्राद्ध में अन्न-निषेध और पितृ तर्पण दोनों का सूक्ष्म समन्वय करना पड़ता है।
एकादशी श्राद्ध क्यों विशेष है को संदर्भ सहित समझें
एकादशी श्राद्ध क्यों विशेष है का सबसे सीधा सार यह है: क्योंकि यह विष्णु-प्रिय तिथि और पितृ तिथि दोनों है।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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स्वर्लोक में श्राद्ध का फल गंधर्व, नाग और पशु योनि में कैसे मिलता है?
गरुड़ पुराण के अनुसार गंधर्व योनि में श्राद्ध कलाओं के रूप में, नाग योनि में वायु के रूप में और पशु योनि में घास के रूप में मिलता है।
श्राद्ध और तर्पण का स्वर्लोक से क्या संबंध है?
पृथ्वी पर श्रद्धा से किया गया श्राद्ध-तर्पण स्वर्लोक में पूर्वजों को 'अमृत' के रूप में प्राप्त होता है। स्वर्ग में जो जैसा है उसे उसके अनुरूप श्राद्ध का फल मिलता है।
श्राद्ध और पिंडदान का भुवर्लोक से क्या संबंध है?
भुवर्लोक में भटक रही प्रेत-आत्माओं को श्राद्ध और पिंडदान से सूक्ष्म ऊर्जा मिलती है जिससे वे इस कष्टदायी लोक को पार करके पितृलोक तक पहुँच सकती हैं।
वैकुंठ एकादशी का महत्व क्या है?
वैकुंठ एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को आती है और सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। इस दिन वैकुंठ के द्वार खुलते हैं, पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है। व्रत, विष्णु सहस्रनाम पाठ और रात्रि जागरण इस दिन विशेष फलदायी है।
सफला एकादशी का महत्व
सफला एकादशी पौष कृष्ण एकादशी को मनाई जाती है। यह जीवन के रुके कार्यों को पूरा करने और सफलता दिलाने वाली एकादशी है। लुम्पक की कथा इसका आधार है, जिसे अनजाने में व्रत करने पर भी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हुई।
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