विस्तृत उत्तर
शालिग्राम की पूजा अत्यंत सरल और पवित्र विधि से की जाती है। इसमें प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि इसमें विष्णु जी स्वयं नित्य विराजित माने जाते हैं।
पूजा की मुख्य विधि: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। शालिग्राम को स्वच्छ गंगाजल या तुलसी-मिश्रित जल से स्नान कराएं (अभिषेक करें)। इसके बाद पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी या गंगाजल) से अभिषेक करें और फिर पुनः शुद्ध जल से धोएं। तुलसी की पत्तियाँ अर्पित करें — यह शालिग्राम पूजा में अनिवार्य है। चंदन, अक्षत (हल्दी-रंगे पीले चावल), पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें। नैवेद्य में खीर, हलवा, फल या गुड़ अर्पित करें। 'ॐ नमो नारायणाय' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
महत्वपूर्ण नियम: शालिग्राम को सदा ऊँचे स्थान पर रखें, जमीन पर नहीं। यदि एक बार शालिग्राम घर में लाएं तो नित्य पूजा का संकल्प रखें — कभी भी इसकी पूजा बंद नहीं करनी चाहिए। अशुद्ध अवस्था में इसे स्पर्श न करें। शालिग्राम की पूजा शुद्ध भाव और भक्ति से करने पर भगवान विष्णु की असीम कृपा मिलती है — यह शास्त्रों में कहा गया है।





