विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण अठारह महापुराणों में आकार की दृष्टि से सबसे छोटा है, किन्तु महत्व में अत्यंत उच्च स्थान रखता है। इसकी रचना महर्षि पराशर (महाभारत रचयिता वेदव्यास के पिता) ने की है। यह पुराण ऋषि मैत्रेय और पराशर के संवाद के रूप में प्रस्तुत है।
विष्णु पुराण 6 अंशों (खण्डों) में विभाजित है। वर्तमान में इसमें लगभग सात हजार श्लोक उपलब्ध हैं, जबकि विभिन्न ग्रंथों में इसकी मूल श्लोक संख्या तेईस हजार बताई जाती है।
छह अंशों की विषय-वस्तु इस प्रकार है: प्रथम अंश में सृष्टि की उत्पत्ति, काल का स्वरूप, ध्रुव, पृथु और प्रह्लाद की कथाएँ हैं। द्वितीय अंश में लोकों का स्वरूप, पृथ्वी के नौ खण्ड और ग्रह-नक्षत्र का वर्णन है। तृतीय अंश में मन्वन्तर, वेद शाखाओं का विस्तार और गृहस्थ धर्म है। चतुर्थ अंश में सूर्यवंश और चन्द्रवंश के राजाओं की वंशावली है। पंचम अंश में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और लीलाओं का विस्तृत वर्णन है — यह अंश सबसे बड़ा है। षष्ठ और अन्तिम अंश में प्रलय और मोक्ष का उल्लेख है।
संक्षेप में: 6 अंश (भाग), लगभग 7,000 उपलब्ध श्लोक, महर्षि पराशर द्वारा रचित।





