विस्तृत उत्तर
हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में 14 लोक (भुवन) वर्णित हैं — 7 ऊर्ध्व (ऊपर) और 7 अधो (नीचे)। विष्णु पुराण और भागवत पुराण में इनका विस्तृत वर्णन है।
सात ऊर्ध्व लोक (नीचे से ऊपर)
- 1भूलोक (पृथ्वी) — मनुष्य, जीव-जंतुओं का निवास। कर्मभूमि।
- 2भुवर्लोक — पृथ्वी और सूर्य के बीच। अंतरिक्ष देवता, सिद्ध, पितर निवास करते हैं।
- 3स्वर्लोक (स्वर्गलोक) — सूर्य से ध्रुव तक। इंद्र, देवता, अप्सराएँ, गंधर्व का निवास।
- 4महर्लोक — ध्रुव से ऊपर। महान ऋषियों (भृगु आदि) का निवास। प्रलय में नष्ट नहीं होता पर रहने योग्य नहीं रहता।
- 5जनलोक — ब्रह्मा के मानसपुत्रों (सनकादि) का निवास।
- 6तपलोक — वैराज्य देवताओं और महान तपस्वियों का स्थान। यहाँ हजारों वर्ष तक तपस्या होती है।
- 7सत्यलोक (ब्रह्मलोक) — सबसे ऊपर। ब्रह्मा जी और माता सरस्वती का निवास। यहाँ से सृष्टि की रचना होती है। यहाँ मृत्यु, बुढ़ापा और दुख नहीं।
विष्णु पुराण वर्गीकरण
- ▸भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक = कृतक लोक (प्रलय में नष्ट)
- ▸जनलोक, तपलोक, सत्यलोक = अकृतक लोक (प्रलय में अप्रभावित)
- ▸महर्लोक = कृतकाकृतक (नष्ट नहीं पर निवास अयोग्य)
सात अधो लोक (पाताल)
अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल — इनमें दैत्य, दानव, नाग, यक्ष निवास करते हैं। ये नर्क नहीं हैं — भागवत पुराण के अनुसार ये स्वर्ग से भी सुंदर और वैभवशाली हैं।





