विस्तृत उत्तर
हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में विभिन्न लोकों का वर्णन है। देवलोक, ब्रह्मलोक और विष्णुलोक तीन भिन्न स्थान हैं।
1देवलोक (स्वर्गलोक)
- ▸स्थान: 14 लोकों में तीसरा ऊर्ध्व लोक (भूलोक→भुवर्लोक→स्वर्लोक)।
- ▸शासक: इंद्र (देवराज)।
- ▸निवासी: देवता (इंद्र, वरुण, वायु, अग्नि आदि), अप्सराएँ, गंधर्व, किन्नर।
- ▸विशेषता: पुण्य कर्मों का फल भोगने का स्थान। अस्थायी — पुण्य क्षीण होने पर पुनः पृथ्वी पर जन्म।
- ▸गीता (9.21): *'क्षीणे पुण्ये मर्त्यलोकं विशन्ति'* — पुण्य क्षीण होने पर मृत्युलोक (पृथ्वी) लौटते हैं।
2ब्रह्मलोक (सत्यलोक)
- ▸स्थान: 14 लोकों में सबसे ऊपर, सातवाँ ऊर्ध्व लोक।
- ▸शासक: ब्रह्मा जी।
- ▸निवासी: ब्रह्मा, सरस्वती, महान ऋषि, सृष्टि के आरंभिक प्राणी।
- ▸विशेषता: यहाँ मृत्यु, बुढ़ापा, दुख नहीं। प्रलय में भी अप्रभावित (अकृतक लोक)। ब्रह्मा की आयु (100 ब्रह्मवर्ष) पूर्ण होने पर ही यह लोक समाप्त होता है।
3विष्णुलोक (वैकुंठ)
- ▸स्थान: 14 लोकों से परे — त्रिगुणातीत, शाश्वत, अविनाशी।
- ▸शासक: भगवान विष्णु (नारायण)।
- ▸निवासी: विष्णु, लक्ष्मी, मुक्त आत्माएँ (मोक्ष प्राप्त)।
- ▸विशेषता: शाश्वत — कभी नष्ट नहीं, प्रलय में भी अप्रभावित। यहाँ से कोई लौटकर नहीं आता — यही मोक्ष है। गीता (15.6): *'यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम'*।
शिवलोक (कैलाश): भगवान शिव का निवास। कैलाश पर्वत को शिवलोक माना जाता है। शैव परंपरा में यह मोक्ष स्थान है।
मुख्य अंतर
| विषय | देवलोक | ब्रह्मलोक | विष्णुलोक |
|-------|--------|-----------|------------|
| स्थायित्व | अस्थायी | दीर्घकालिक | शाश्वत |
| शासक | इंद्र | ब्रह्मा | विष्णु |
| वापसी | हाँ (पुण्य क्षीण) | हाँ (प्रलय) | नहीं (मोक्ष) |





