विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक को विभिन्न शास्त्रों में अनेक नामों से जाना जाता है। वैदिक त्रिलोकी की संकल्पना में इसे 'स्वः' कहा जाता है जो व्याहृतियों (भूर्भुवः स्वः) का तीसरा और सबसे प्रधान पद है। इसे 'स्वर्ग' भी कहते हैं जो स्वयं प्रकाशमान स्थान का बोध कराता है। पुराणों में इसे 'देवलोक' भी कहा जाता है क्योंकि यह देवताओं का निवास स्थान है। इसे 'त्रिदिव' भी कहते हैं। अमरावती नगरी को 'देवपुर' (देवताओं का नगर) और 'पूषाभासा' (सूर्य के समान तेजस्वी) भी कहा गया है। शिशुमार चक्र के मंत्र में इसे 'ज्योतिर्लोक' कहा गया है — 'नमो ज्योतिर्लोकाय'। ब्रह्मांड पुराण में वर्णित चौदह भुवनों में यह ऊर्ध्व लोक की श्रेणी में आता है।
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