विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु चतुर्भुज हैं — उनके चारों हाथों में चार दिव्य वस्तुएँ हैं जिनका अपना-अपना गहन अर्थ है। पुराणों के अनुसार उनका सम्पूर्ण स्वरूप ज्ञानात्मक और प्रतीकात्मक है।
नीचे वाले बाएँ हाथ में पद्म (कमल): कमल पवित्रता और निर्लिप्तता का प्रतीक है। जैसे कमल पानी में रहकर भी उससे अलिप्त रहता है, उसी प्रकार भगवान सृष्टि में रहते हुए उससे परे हैं। यह ज्ञान और मोक्ष का भी प्रतीक है।
नीचे वाले दाहिने हाथ में गदा (कौमोदकी): गदा बल, शक्ति और न्याय का प्रतीक है। यह दुष्टों के लिए भय और सज्जनों के लिए रक्षा का प्रतीक है। यह मानव-मन की जड़ता (तमोगुण) को नष्ट करने का भी प्रतीक माना गया है।
ऊपर वाले बाएँ हाथ में शंख (पाञ्चजन्य): शंख सृष्टि के आदि नाद — ॐ — का प्रतीक है। शंख की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है। पुराणों में यह पंचमहाभूतों के उदय का कारण तामस अहंकार का प्रतीक माना गया है।
ऊपर वाले दाहिने हाथ में चक्र (सुदर्शन): सुदर्शन चक्र सात्विक अहंकार और ज्ञान का प्रतीक है। यह निरंतर गतिमान सूर्य का प्रतीक है — जो काल और समय का चक्र है। यह लक्ष्योन्मुखता और अमोघ दंड का भी प्रतीक है।





