विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु के शरीर का नीला या मेघश्याम वर्ण पूर्णतः प्रतीकात्मक है और इसके कई गहरे अर्थ हैं जिनका उल्लेख शास्त्रों और परम्पराओं में मिलता है।
नीला रंग आकाश का प्रतीक है — जैसे आकाश सर्वव्यापी और अपरिभाषित है, उसी प्रकार भगवान विष्णु भी समस्त ब्रह्माण्ड में व्याप्त और किसी एक परिभाषा में न बँधने वाले हैं। विष्णु का अर्थ ही है 'विश्व में व्याप्त'।
नीला रंग जल और समुद्र का भी प्रतीक है। भगवान विष्णु क्षीरसागर (दूध के समुद्र) में शेषनाग पर शयन करते हैं। समुद्र का नीला रंग आकाश के प्रतिबिम्ब के कारण है और इसी भाव से विष्णु जी का वर्ण नीला दर्शाया जाता है। 'नारायण' शब्द का अर्थ है — नारों (जलों) में निवास करने वाले।
इसके अतिरिक्त नीला रंग गहन ध्यान, असीम करुणा, अनन्त शांति और सत्त्वगुण की पराकाष्ठा का भी प्रतीक माना जाता है। भगवान विष्णु के नीले अवतार राम और कृष्ण भी इसी वर्ण के माने जाते हैं। शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् — विष्णु जी के ध्यान में उनके मेघश्याम वर्ण का विशेष उल्लेख है।
संक्षेप में नीला रंग उनकी सर्वव्यापकता, असीमता, शांति और परब्रह्म-स्वरूप का दृश्य प्रतीक है।





