विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण और सुखसागर के अनुसार भगवान विष्णु के 24 अवतार हैं। इनमें से 10 अवतार 'दशावतार' के रूप में विशेष प्रसिद्ध हैं और शेष 14 लीलावतार माने जाते हैं। 24वाँ कल्कि अवतार भविष्य में होना है।
इन 24 अवतारों के नाम इस प्रकार हैं: 1. सनकादिक ऋषि (सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार), 2. नारद, 3. नर-नारायण, 4. कपिल मुनि, 5. दत्तात्रेय, 6. यज्ञ (यज्ञावतार), 7. ऋषभदेव, 8. पृथु, 9. मत्स्य, 10. कूर्म (कच्छप), 11. धन्वन्तरि, 12. मोहिनी, 13. वाराह (वराह), 14. नरसिंह, 15. वामन, 16. हयग्रीव, 17. श्री हरि, 18. परशुराम, 19. महर्षि वेदव्यास, 20. राम, 21. बलराम (कुछ परम्पराओं में), 22. कृष्ण, 23. बुद्ध, 24. कल्कि (अभी होना है)।
यह ध्यान देने योग्य है कि अलग-अलग पुराणों और परम्पराओं में इस सूची में कुछ भेद है। उदाहरण के लिए विकिपीडिया पर वर्णित है कि भागवत महापुराण में 22 तथा 24 अवतारों की गणना के बावजूद बहुमान्य सूची में 10 दशावतार ही प्रमुख माने जाते हैं। प्रत्येक अवतार का एक विशिष्ट उद्देश्य था और उन्होंने अपने युग की चुनौतियों से धर्म की रक्षा की।





