विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु के शंख का नाम 'पाञ्चजन्य' है। यह उनके चार आयुधों में से एक है — शंख (पाञ्चजन्य), चक्र (सुदर्शन), गदा (कौमोदकी) और पद्म (कमल)। पाञ्चजन्य विजय, शक्ति और पवित्र ध्वनि का प्रतीक माना गया है।
पाञ्चजन्य की उत्पत्ति के बारे में दो प्रमुख पौराणिक आख्यान मिलते हैं। पहले के अनुसार समुद्र मंथन में उत्पन्न चौदह रत्नों में से एक यह शंख था जिसे भगवान विष्णु ने धारण किया। दूसरे आख्यान के अनुसार भागवत पुराण में वर्णन है कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने गुरु सान्दीपनि के आश्रम में शिक्षा पूर्ण करने के बाद गुरुदक्षिणा के रूप में उनके मृत पुत्र को लाने का संकल्प लिया। तब श्रीकृष्ण ने समुद्र में जाकर 'शंखासुर' नामक दैत्य का वध किया जो 'पंचजन' सागर में निवास करता था। उसकी हड्डी (खोल) से यह शंख बना जिसे 'पाञ्चजन्य' नाम दिया गया।
महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी पाञ्चजन्य शंख को बजाकर युद्धारंभ की घोषणा की थी। उसकी ध्वनि से सम्पूर्ण आकाश और पृथ्वी गूंज उठी थी। इस शंख की ध्वनि को ॐ की ध्वनि के तुल्य माना जाता है और यह नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने वाली मानी गई है।





