विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण में महर्षि पराशर ने स्वर्ग में पुण्य क्षीण होने के संकेतों का विस्तृत वर्णन किया है। जब किसी देव या पुण्यात्मा के पुण्य समाप्त होने लगते हैं तो दो प्रमुख संकेत मिलते हैं। पहला संकेत — उसके शरीर से पसीना आने लगता है जो स्वर्गिक देह के लिए अत्यंत असामान्य और अशुभ है क्योंकि स्वर्ग में सामान्यतः पसीना नहीं आता। दूसरा संकेत — उसके गले में पड़ी दिव्य पुष्पों की माला कुम्हलाने (मुरझाने) लगती है जबकि स्वर्ग में पुष्प सदैव ताजे और सुगंधित रहते हैं। ये दोनों संकेत इस बात का स्पष्ट संकेत होते हैं कि अब उसे स्वर्ग से निष्कासित होकर पुनः माता के गर्भ के कष्टों और जीवन-मृत्यु के चक्र से गुजरना पड़ेगा। यह स्वर्लोक की अनित्यता का सबसे मार्मिक प्रमाण है।
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