विस्तृत उत्तर
हाँ, निष्काम भाव से किए गए महायज्ञ महर्लोक प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग हैं। परन्तु यहाँ निष्काम का विशेष महत्व है। केवल सकाम दान, सामान्य व्रत और भौतिक यज्ञ मनुष्य को अधिक से अधिक स्वर्लोक तक ही ले जा सकते हैं। जो व्यक्ति शास्त्रों में वर्णित महायज्ञों का निष्काम भाव से — अर्थात बिना किसी फल की इच्छा के — अनुष्ठान करते हैं वे ही महर्लोक के अधिकारी बन सकते हैं। महर्लोक में निवास करने वाले अधिकांश महान ऋषि और प्रजापति वे हैं जिन्होंने अपने पूर्व जन्मों में पूर्ण निष्काम भाव से महान वैदिक यज्ञों का अनुष्ठान किया था और जिन्होंने बिना किसी लौकिक या पारलौकिक फल की इच्छा के अपना सर्वस्व भगवान के श्रीचरणों में अर्पित कर दिया था।
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