विस्तृत उत्तर
महामृत्युंजय मंत्र के जप के लिए सर्वोत्तम समय 'ब्रह्म मुहूर्त' (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पूर्व, प्रात: काल ४:०० बजे के आसपास) माना गया है।
इस समय प्रकृति में असीम शांति होती है और वायुमंडल में प्राणवायु (Oxygen) एवं ओजोन का स्तर सर्वाधिक होता है। आध्यात्मिक दृष्टि से, इस समय ब्रह्मांडीय चेतना अत्यंत ग्रहणशील होती है, जिससे मंत्र की ध्वनि तरंगें सीधे सूक्ष्म जगत तक पहुंचती हैं।
इसके अतिरिक्त, प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में भी जप का विधान है।
विशेष सवा लाख अनुष्ठान का आरंभ सामान्यतः सोमवार के दिन, श्रावण मास, या कार्तिक मास में करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।





