विस्तृत उत्तर
तांत्रिक पूजा निशिता काल मुहूर्त (मध्यरात्रि) में की जाती है, और शनिवार और रविवार का दिन इसके लिए सबसे उत्तम माना गया है।
तांत्रिक पूजा के लिए कौन सा दिन उत्तम है को संदर्भ सहित समझें
तांत्रिक पूजा के लिए कौन सा दिन उत्तम है का सबसे सीधा सार यह है: तांत्रिक पूजा के लिए शनिवार और रविवार सबसे उत्तम दिन हैं — निशिता काल (मध्यरात्रि) में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
साधना का समय जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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बटुक भैरव साधना का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
तांत्रिक पूजा के लिए निशिता काल (मध्यरात्रि) सर्वोत्तम है। गृहस्थों के लिए प्रदोष काल या शाम 7 से 10 बजे के बीच का समय शुभ है।
बटुक भैरव साधना किस दिन शुरू करनी चाहिए?
बटुक भैरव साधना किसी भी मंगलवार या कालाष्टमी (मंगल विशेष अष्टमी) के दिन शुरू करनी चाहिए।
गृहस्थों के लिए बटुक भैरव साधना कब करें?
गृहस्थों के लिए बटुक भैरव साधना का शुभ समय प्रदोष काल (शाम दिन-रात का मिलन) या शाम 7 बजे से 10 बजे के बीच है।
दुर्गाष्टमी व्रत में उदयातिथि और प्रदोष काल में किसे चुनें?
गृहस्थों को सामान्य व्रत के लिए सुबह (उदयातिथि) वाली अष्टमी चुननी चाहिए। लेकिन तांत्रिक और विशेष सिद्धियों के लिए शाम (प्रदोष) और रात वाली अष्टमी चुनी जाती है।
रात 12 बजे के बाद पूजा करना शुभ है या अशुभ
सामान्य पूजा मध्यरात्रि के बाद वर्जित मानी जाती है (तमोगुण प्रधान काल)। परंतु महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी, दीपावली जैसे विशेष पर्वों पर मध्यरात्रि पूजा शुभ और शास्त्रसम्मत है। तांत्रिक साधना केवल दीक्षित साधकों के लिए है।
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