विस्तृत उत्तर
बटुक भैरव की उपासना काल भैरव की तरह मुख्यतः रात्रि काल से जुड़ी है।
तांत्रिक काल: तांत्रिक पूजा निशिता काल मुहूर्त (मध्यरात्रि) में की जाती है, और शनिवार और रविवार का दिन इसके लिए सबसे उत्तम माना गया है।
गृहस्थ हेतु काल: गृहस्थ साधकों के लिए प्रदोष काल (शाम का समय जब दिन और रात का मिलन होता है) या शाम 7 बजे से 10 बजे के बीच का समय अत्यंत शुभ माना जाता है।





