विस्तृत उत्तर
शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना गया है। उनकी साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा के दौरान आने वाले गंभीर कष्टों को शांत करने के लिए उनका तांत्रिक बीज मंत्र 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' अत्यंत प्रभावी माना गया है।
इस मंत्र के जप का सबसे उचित समय सूर्यास्त के बाद का समय (गोधूलि बेला या निशीथ काल) होता है, क्योंकि शनि को अंधकार और रात्रि का बल प्राप्त है। शनिवार की शाम को पश्चिम दिशा की ओर मुख करके, सरसों के तेल का दीपक जलाकर, काले हकीक या रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करना चाहिए। जप के समय नीले या काले वस्त्र धारण करना उत्तम है। यह साधना शनि के अशुभ प्रभावों को कम कर धैर्य, स्थिरता और कार्यक्षेत्र में सफलता प्रदान करती है।





