साधना का समयतांत्रिक पूजा के लिए कौन सा दिन उत्तम है?तांत्रिक पूजा के लिए शनिवार और रविवार सबसे उत्तम दिन हैं — निशिता काल (मध्यरात्रि) में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।#तांत्रिक पूजा#शनिवार#रविवार
साधना का समयबटुक भैरव साधना का सबसे अच्छा समय कौन सा है?तांत्रिक पूजा के लिए निशिता काल (मध्यरात्रि) सर्वोत्तम है। गृहस्थों के लिए प्रदोष काल या शाम 7 से 10 बजे के बीच का समय शुभ है।#निशिता काल#मध्यरात्रि#तांत्रिक पूजा
तिथि निर्णयदुर्गाष्टमी व्रत में उदयातिथि और प्रदोष काल में किसे चुनें?गृहस्थों को सामान्य व्रत के लिए सुबह (उदयातिथि) वाली अष्टमी चुननी चाहिए। लेकिन तांत्रिक और विशेष सिद्धियों के लिए शाम (प्रदोष) और रात वाली अष्टमी चुनी जाती है।#प्रदोष काल#उदयातिथि#तांत्रिक पूजा
पूजा विधिरात 12 बजे के बाद पूजा करना शुभ है या अशुभसामान्य पूजा मध्यरात्रि के बाद वर्जित मानी जाती है (तमोगुण प्रधान काल)। परंतु महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी, दीपावली जैसे विशेष पर्वों पर मध्यरात्रि पूजा शुभ और शास्त्रसम्मत है। तांत्रिक साधना केवल दीक्षित साधकों के लिए है।#रात्रि पूजा#निशिथ काल#तांत्रिक पूजा
तंत्र-वेद तुलनातांत्रिक विधि और वैदिक विधि में पूजा का क्या अंतर है?वैदिक: बाह्य यज्ञ-हवन, वेद मंत्र, अग्नि आहुति, द्विज अधिकार, चतुर्वर्ग लक्ष्य। तांत्रिक: आंतरिक साधना, बीज मंत्र-यंत्र-न्यास, शक्ति उपासना, जाति-भेद नहीं, भोग+मोक्ष दोनों। दोनों विरोधी नहीं — आज की पूजा में दोनों का मिश्रण।#तांत्रिक पूजा#वैदिक पूजा#अंतर
तंत्र साधनायंत्र की पूजा मूर्ति पूजा से कैसे भिन्न होती है?मूर्ति = देवता का साकार स्थूल रूप (भक्ति-प्रधान)। यंत्र = देवता का ज्यामितीय सूक्ष्म रूप (शक्ति-प्रधान)। शारदातिलक: 'मूर्ति = शरीर, यंत्र = आत्मा'। यंत्र-मंत्र-देवता = एक सत्ता के तीन रूप। यंत्र = ऊर्जा केन्द्र। दोनों मिलकर = पूर्ण उपासना। तांत्रिक साधक → यंत्र प्राथमिक।#यंत्र पूजा#मूर्ति पूजा#श्रीयंत्र