विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार वाहन खरीदने और पूजन के लिए निम्नलिखित दिनों और तिथियों से बचना चाहिए:
त्याज्य तिथियाँ: अमावस्या, चतुर्थी (४), नवमी (९) और चतुर्दशी (१४) — ये 'रिक्ता' तिथियाँ मानसिक अस्थिरता और अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं।
राहुकाल: धर्मसिंधु के अनुसार, राहुकाल में किया गया कोई भी शुभ कार्य भविष्य में 'अरिष्ट' (अनिष्ट) का कारण बन सकता है। अतः मुहूर्त निकालते समय राहुकाल का त्याग अनिवार्य है।
भद्रा और पंचक दोष: इनका भी विचार किया जाना चाहिए, विशेषकर जब वाहन लोहे से निर्मित हो।





