लोकनाना-नानी का श्राद्ध कब करें?नाना-नानी के लिए प्रतिपदा श्राद्ध विशेष माना गया है।#नाना नानी श्राद्ध#मातामह#प्रतिपदा
लोकपड़वा श्राद्ध क्या होता है?पड़वा श्राद्ध प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध है।#पड़वा श्राद्ध#प्रतिपदा#महालय
लोकमातामह श्राद्ध क्या है?नाना-नानी के लिए किया जाने वाला श्राद्ध मातामह श्राद्ध है।#मातामह श्राद्ध#नाना श्राद्ध#प्रतिपदा
लोकनाना-नानी का श्राद्ध कब करें?नाना-नानी के श्राद्ध के लिए प्रतिपदा तिथि विशेष मानी गई है।#नाना नानी श्राद्ध#मातामह श्राद्ध#प्रतिपदा
मातामह श्राद्धनाना-नानी की मृत्यु तिथि याद न हो तो श्राद्ध कब करें?नाना-नानी की मृत्यु तिथि याद न हो या किसी अन्य तिथि पर हुई हो — फिर भी श्राद्ध पितृ पक्ष की 'प्रतिपदा तिथि' को ही करें। यह प्रतिपदा का विशेष विशेषाधिकार है जो केवल मातृकुल को दिया गया है।#नाना-नानी मृत्यु तिथि#प्रतिपदा#मातामह श्राद्ध
देवी पूजन और आवाहननवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है?नवरात्रि का पहला दिन (प्रतिपदा) = माँ शैलपुत्री को समर्पित। माता शैलपुत्री = हिमालय की पुत्री। वे मानव की आंतरिक शक्ति, दृढ़ता और प्रकृति की आदि-ऊर्जा की साक्षात् प्रतीक हैं।#नवरात्रि पहला दिन#माँ शैलपुत्री#प्रतिपदा
शुभ मुहूर्त2026 में चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?2026 चैत्र नवरात्रि: 19 मार्च (गुरुवार)। सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 06:52 से 07:43 (मीन लग्न + शुद्ध प्रतिपदा)। अभिजित मुहूर्त: 12:05 से 12:53। राहुकाल: 14:48 से 16:18 (वर्जित)। 06:52 से पहले अमावस्या प्रभाव — उससे पहले न करें।#2026 कलश स्थापना मुहूर्त#19 मार्च#मीन लग्न
शुभ मुहूर्तकलश स्थापना सुबह किस समय करनी चाहिए?कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय = प्रतिपदा का प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल)। 2026 में 19 मार्च: प्रातः 06:52 से 07:43 (मीन लग्न + शुद्ध प्रतिपदा का संयोग)। 06:52 से पहले अमावस्या प्रभाव — उससे पहले न करें।#कलश स्थापना समय#प्रातःकाल#प्रतिपदा
शुभ मुहूर्तकलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कैसे निकालें?मुहूर्त के नियम (निर्णयसिन्धु): प्रतिपदा तिथि की व्याप्ति अनिवार्य। सर्वश्रेष्ठ = प्रतिपदा का प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल)। विकल्प = अभिजित मुहूर्त (मध्याह्न)। शुभ लग्न = द्विस्वभाव (मीन, मिथुन, कन्या, धनु)।#कलश स्थापना मुहूर्त#निर्णयसिन्धु#प्रतिपदा
त्योहार पूजानवरात्रि में कलश स्थापना कब और कैसे करें?कलश स्थापना: प्रतिपदा, शुभ मुहूर्त (भद्रा वर्जित)। विधि: जौ बोएँ → तांबे कलश में गंगाजल + सप्तमृत्तिका + पंचरत्न → स्वस्तिक-मौली → आम पत्ते + नारियल → 'ॐ आ जिघ्र कलशं...' मंत्र → देवी आवाहन → अखण्ड ज्योति। 9 दिन अचल रहे।#नवरात्रि#कलश स्थापना#घटस्थापना