विस्तृत उत्तर
चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिन (प्रतिपदा) भगवती 'शैलपुत्री' को समर्पित है।
माता शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं और वे मानव के भीतर छिपी आंतरिक शक्ति, दृढ़ता और प्रकृति की आदि-ऊर्जा की साक्षात प्रतीक हैं।
नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है को संदर्भ सहित समझें
नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है का सबसे सीधा सार यह है: नवरात्रि का पहला दिन (प्रतिपदा) = माँ शैलपुत्री को समर्पित। माता शैलपुत्री = हिमालय की पुत्री। वे मानव की आंतरिक शक्ति, दृढ़ता और प्रकृति की आदि-ऊर्जा की साक्षात्...
देवी पूजन और आवाहन जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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नवरात्रि में देवी को कौन सी धूप लगानी चाहिए?
देवी को धूप: काले अगरु + कपूर + लाल चंदन + सिह्लक (लोबान) + गुग्गुल को घी में संतृप्त करके बनाई गई धूप। स्थल शुद्धि के लिए गुग्गुल और लोबान की धूप — देवी को अत्यंत प्रिय और नकारात्मक ऊर्जा नाशक।
देवी को बिल्वपत्र कैसे चढ़ाएं?
बिल्वपत्र चढ़ाने की विधि: तीन पत्तियों वाले बेलपत्र पर लाल चंदन से 'ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः' तीन बार लिखकर अर्पित करें। मंत्र: 'ॐ जयन्ती, मङ्गला, काली... एष सचन्दन गन्ध पुष्प बिल्व पत्राञ्जली ॐ ह्रीं दुर्गायै नमः।'
देवी को पंचामृत स्नान कराने से क्या फल मिलता है?
देवी स्नान के फल (देवी भागवत): ईख का रस = पुनर्जन्म से मुक्ति + लक्ष्मी-सरस्वती का वास। द्राक्षा रस = देवी-लोक में वास। सुगंधित जल = सौ जन्मों के पाप नाश। दूध = एक कल्प क्षीरसागर में निवास। शहद/घी/शर्करा = इस लोक-परलोक में असीम सुख।
नवरात्रि में षोडशोपचार पूजा कैसे करें?
षोडशोपचार पूजा (देवी भागवत, एकादश स्कन्ध, अध्याय 18): 1. पीठ पूजा+ध्यान, 2. स्नान, 3. वस्त्र-आभूषण, 4. गंध-कुमकुम-सिंदूर, 5. पुष्प-बिल्वपत्र, 6. धूप-दीप, 7. नैवेद्य-तांबूल, 8. आरती-वाद्य, 9. प्रदक्षिणा-क्षमा प्रार्थना।
माँ शैलपुत्री का मंत्र क्या है?
माँ शैलपुत्री का आवाहन मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नमः।' बीज मंत्र: 'ह्रीं श्रीं शैलपुत्र्यै नमः'
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