विस्तृत उत्तर
पौराणिक कथा के अनुसार, दक्ष के यज्ञ में सती द्वारा योगाग्नि में देह त्याग के बाद भगवान शिव विरक्त होकर तप में लीन हो गए।
संसार के कल्याण तथा शिव को फिर से जगत के कार्यों में संलग्न करने के लिए आदिशक्ति ने पार्वती (हिमालय की पुत्री) के रूप में अवतार लिया।
बचपन से ही शैलपुत्री को भगवान शिव को पति रूप में पाने की लगन थी। आगे चलकर इन्होंने कठोर तपस्या करके शिव को प्राप्त किया।
शैलपुत्री का यह अवतार हमें बताता है कि अत्यंत त्याग और समर्पण के बाद ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
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