उत्पत्ति की कथामाँ शैलपुत्री के अवतरण की कथा क्या है?अवतरण कथा: दक्ष यज्ञ में सती की देह त्याग → शिव विरक्त + तप में लीन। संसार कल्याण + शिव को जगत कार्यों में वापस लाने के लिए → आदिशक्ति ने हिमालय-पुत्री पार्वती के रूप में अवतार। बचपन से शिव को पति रूप में पाने की लगन → कठोर तपस्या से शिव को प्राप्त किया।#शैलपुत्री अवतरण#शिव विरक्त#आदिशक्ति
देवी पूजन और आवाहननवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है?नवरात्रि का पहला दिन (प्रतिपदा) = माँ शैलपुत्री को समर्पित। माता शैलपुत्री = हिमालय की पुत्री। वे मानव की आंतरिक शक्ति, दृढ़ता और प्रकृति की आदि-ऊर्जा की साक्षात् प्रतीक हैं।
माँ पार्वती परिचय और व्युत्पत्ति'पार्वती' और 'शैलपुत्री' नाम का क्या अर्थ है?'पार्वती' = 'पर्वत' से व्युत्पन्न — हिमालय राजा हिमावन की पुत्री। 'शैल' = पर्वत, इसलिए 'शैलपुत्री'। पर्वत = अचल दृढ़ता-स्थिरता-तपस्या का प्रतीक। यह नाम उनकी अचल निष्ठा और अडिग संकल्प को प्रमाणित करता है।#पार्वती अर्थ#शैलपुत्री#हिमालय पुत्री