विस्तृत उत्तर
ब्रह्मचारिणी देवी के अवतरण का उद्देश्य था — शिव जैसे कठिन स्वभाव वाले देवता को अपनी तपस्या के बल पर प्राप्त करना, ताकि पार्वती और शिव के मिलन से जगत का कल्याण हो और भगवान कार्तिकेय (स्कंद) का जन्म संभव हो सके, जो आगे चलकर तारकासुर जैसे दैत्य का संहार करेंगे।
इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का तप स्वरूप पूरी सृष्टि के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





