विस्तृत उत्तर
माँ ब्रह्मचारिणी की तपस्या की कथा:
— नारद मुनि के उपदेश पर हिमालय-कन्या पार्वती ने बाल्यकाल से ही तपस्या आरंभ कर दी।
— उन्होंने हजारों वर्षों तक कठिन व्रत रखे।
— शुरुआत में केवल फल-फूल पर निर्वाह।
— फिर सूखे बिल्व पत्रों का सेवन।
— अंत में निर्जला निराहार तपस्या।
— इस दौरान देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया था, पर उन्होंने तप नहीं त्यागा।
— उनकी कठोर तपस्या से समस्त देवगण प्रभावित हुए और शिव जी को प्रसन्न होना पड़ा।
— अंततः उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी रूप में स्वीकार किया।
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