माँ ब्रह्मचारिणी की तपस्या की कथा क्या है?
की चेकलिस्ट
तपस्या कथा: नारद उपदेश → बाल्यकाल से तपस्या → हजारों वर्ष कठिन व्रत। क्रम: फल-फूल → सूखे बिल्व पत्र → निर्जला निराहार। शरीर क्षीण फिर भी तप नहीं त्यागा। समस्त देवगण प्रभावित → शिव प्रसन्न → प्रकट → पार्वती को अर्धांगिनी स्वीकार।
- 1नारद मुनि के उपदेश पर हिमालय-कन्या पार्वती ने बाल्यकाल से ही तपस्या आरंभ कर दी।
- 2उन्होंने हजारों वर्षों तक कठिन व्रत रखे।
- 3शुरुआत में केवल फल-फूल पर निर्वाह।
- 4फिर सूखे बिल्व पत्रों का सेवन।
- 5अंत में निर्जला निराहार तपस्या।
- 6इस दौरान देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया था, पर उन्होंने तप नहीं त्यागा।
- 7उनकी कठोर तपस्या से समस्त देवगण प्रभावित हुए और शिव जी को प्रसन्न होना पड़ा।
- 8अंततः उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी रूप में स्वीकार किया।
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उत्पत्ति की कथा
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