कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को षष्ठी को क्यों पूजा जाता है?कार्तिकेय को षष्ठी को इसलिए पूजा जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार उनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था। उनकी पत्नी देवसेना को 'षष्ठी माता' भी कहते हैं। दक्षिण भारत में स्कंद षष्ठी इस कारण विशेष पर्व है।#कार्तिकेय षष्ठी#छठ पूजा#स्कंद षष्ठी
कार्तिकेय कथाशिव का वीर्य जो अग्नि में पड़ा उससे कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?शिव का दिव्य तेज अग्निदेव ने ग्रहण किया, फिर गंगा को सौंपा। गंगाजल में बहकर वह छह भागों में विभाजित होकर शरवण वन में छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। कृत्तिकाओं ने उन्हें दूध पिलाया और पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख कार्तिकेय को प्राप्त किया।#कार्तिकेय जन्म#शिव तेज#अग्निदेव
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय का जन्म क्यों हुआ था?कार्तिकेय का जन्म तारकासुर के वध के लिए हुआ था। तारकासुर को यह वरदान था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र से ही होगा। तीनों लोकों में उसके अत्याचार से त्रस्त देवताओं की रक्षा के लिए कार्तिकेय का अवतरण हुआ।#कार्तिकेय जन्म#तारकासुर#शिव पुत्र
उत्पत्ति की कथामाँ ब्रह्मचारिणी के अवतरण का क्या उद्देश्य था?अवतरण का उद्देश्य: तपस्या के बल पर शिव को प्राप्त करना → शिव-पार्वती मिलन से जगत कल्याण → कार्तिकेय (स्कंद) का जन्म → तारकासुर जैसे दैत्य का संहार। ब्रह्मचारिणी का तप = पूरी सृष्टि के कल्याण का मार्ग।#अवतरण उद्देश्य#शिव पार्वती मिलन#कार्तिकेय जन्म
अवतार की कथाभगवान स्कंद (कार्तिकेय) का जन्म कैसे हुआ?कार्तिकेय जन्म: सामान्य तरीके से नहीं। भगवान शिव के तेज से → अग्निदेव और गंगाजी के माध्यम से → छह कृत्तिका नक्षत्रों (स्त्रियों) ने धारण किया → पार्वती ने छह बच्चों को एकाकार करके स्कंद को गोद में लिया।#कार्तिकेय जन्म#शिव तेज#अग्निदेव गंगा
कार्तिकेय और गणेश जन्मभगवान कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?शिव-पार्वती के मिलन का तेज → अग्नि ने धारण किया → गंगा में प्रवाहित → शरवण वन में 6 बालक → कृत्तिका कन्याओं ने पालन किया → पार्वती के आलिंगन से 6 बालक मिलकर षडानन (कार्तिकेय) बने → तारकासुर वध।#कार्तिकेय जन्म#षडानन#कृत्तिका