विस्तृत उत्तर
माता पार्वती ने जालंधर को इसलिए पहचान लिया क्योंकि वे स्वयं आदिशक्ति और माया की अधीश्वरी हैं। जालंधर ने शिव का रूप धारण किया था, पर उसके भीतर शिव की करुणा, चेतना और दिव्यता नहीं थी। बाहरी रूप भले ही शिव जैसा था, पर उसकी ऊर्जा, दृष्टि और उद्देश्य आसुरी था। पार्वती ने छद्म रूप को देखते ही जान लिया कि यह वास्तविक महादेव नहीं हैं। वे तुरंत वहाँ से अंतर्ध्यान हो गईं। इसके बाद उन्होंने भगवान विष्णु का स्मरण किया और बताया कि जालंधर को उसके बल से नहीं, बल्कि वृंदा के सतीत्व के कवच को तोड़े बिना परास्त नहीं किया जा सकता।
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