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विस्तृत उत्तर
माना जाता है कि माँ कूष्मांडा ने अपने उदर से ही समस्त ब्रह्माण्ड को धारण किया हुआ है, इसलिए उन्हें जगत जननी के रूप में पूजा जाता है।
देवी के इस अवतार का मुख्य उद्देश्य था सृजन — यानी ब्रह्मांड की रचना करना और जीवन का संचार करना।
यह भी विश्वास है कि उनकी हंसी द्वारा उत्पन्न ऊर्जा ही संसार के जीवों का पोषण करती है।
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